शून्य कोटि की अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सांद्रता की शून्य घात के समानुपाती होता है।
$\therefore \text{वेग} \propto [R]^{0}$
दी गई अभिक्रिया $R \to P$ एक शून्य कोटि की अभिक्रिया है,जिसका अवकलित वेग समीकरण इस प्रकार है:
$\text{वेग} = -\frac{d[R]}{dt} = k[R]^{0}$
चूंकि $[R]^{0} = 1$,इसलिए:
$-\frac{d[R]}{dt} = k \quad \dots (i)$
समीकरण को व्यवस्थित करने पर:
$d[R] = -k dt \quad \dots (ii)$
दोनों पक्षों का समाकलन करने पर:
$[R] = -kt + I \quad \dots (iii)$
जहां $I$ समाकलन स्थिरांक है।
जब $t = 0$ है,तो अभिकारक की सांद्रता $[R] = [R]_{0}$ होती है,जहां $[R]_{0}$ प्रारंभिक सांद्रता है।
इन मानों को समीकरण $(iii)$ में रखने पर:
$[R]_{0} = (-k \times 0) + I$
$\therefore I = [R]_{0} \quad \dots (iv)$
$I$ का मान समीकरण $(iii)$ में रखने पर:
$[R] = -kt + [R]_{0}$
$k$ के लिए समीकरण को व्यवस्थित करने पर:
$kt = [R]_{0} - [R]$
$\therefore k = \frac{[R]_{0} - [R]}{t}$